TMC Internal Revolt: Mamata Banerjee's 60 MLAs Rebel —
Is Bengal's Queen Losing Her Crown?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी विधायक रितब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि पार्टी के 80 में से 60 विधायक उनके साथ हैं — और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर नेता प्रतिपक्ष पद पर दावा ठोक दिया है। यह सिर्फ एक पद की लड़ाई नहीं है — यह ममता बनर्जी के दशकों पुराने एकछत्र राज पर सीधा हमला है।
TMC संकट की शुरुआत कहाँ से हुई?
विधानसभा चुनावों में हार के बाद से ही ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं। पहले राज्य की सत्ता गई, और अब पार्टी के भीतर से ही उनकी कुर्सी को चुनौती मिलने लगी है। यह संकट तब सार्वजनिक हुआ जब TMC के दो विधायकों — संदीपन साहा और रितब्रत बनर्जी — ने विधानसभा सचिवालय में एक चौंकाने वाली शिकायत दर्ज कराई।
उनका आरोप था कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने वाले पत्र में उनके हस्ताक्षर बिना अनुमति के, जाली तरीके से लगाए गए। यह आरोप छोटा नहीं था — यह सीधे पार्टी नेतृत्व की ईमानदारी पर सवाल था।
रितब्रत बनर्जी का दावा है कि TMC के 80 में से 60 विधायकों ने उनके पक्ष में हस्ताक्षर किए हैं — यानी पार्टी के तीन-चौथाई से अधिक विधायक उनके साथ खड़े हैं।
निष्कासन के बाद भी नहीं झुके रितब्रत
जब ममता बनर्जी खेमे को अहसास हुआ कि यह विद्रोह गंभीर है, तो पार्टी ने तत्काल कार्रवाई की। संदीपन साहा और रितब्रत बनर्जी दोनों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में TMC से निष्कासित कर दिया गया।
लेकिन रितब्रत झुके नहीं। निष्कासन की परवाह किए बिना वे विधानसभा पहुंचे, 60 विधायकों का समर्थन पत्र लेकर, और विधानसभा अध्यक्ष के सामने नेता प्रतिपक्ष का दावा प्रस्तुत कर दिया। यह एक ऐसा कदम था जिसने पूरे बंगाल की राजनीति को हिला कर रख दिया।
— रितब्रत बनर्जी, बागी TMC विधायक
कौन हैं रितब्रत बनर्जी? — एक राजनीतिक यात्रा
रितब्रत बनर्जी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे पश्चिम बंगाल की राजनीति में छात्र आंदोलन से उभरे और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPM की छात्र इकाई के महासचिव रहे।
- CPM की छात्र इकाई में करीब 8 वर्षों तक नेतृत्व किया
- CPM ने उन्हें राज्यसभा में भेजा — वामपंथी राजनीति में बड़ा मुकाम
- वामदलों से विवाद के बाद निष्कासन हुआ
- वर्ष 2021 में TMC में शामिल, पहली बार विधायक बने
- अब TMC के भीतर सबसे बड़े बागी चेहरे के रूप में उभरे
उनके समर्थन में खड़े विधायकों में अरूप रॉय, सिउली साहा, अरुनाभ सेन, बरनाली धारा, उषारानी मंडल और नियामत शेख जैसे कई जाने-माने नाम शामिल हैं — जो इस विद्रोह को और अधिक वजनदार बनाते हैं।
ममता बनर्जी के लिए क्यों है यह सबसे बड़ा खतरा?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह संकट ममता बनर्जी के लिए अब तक की सबसे जटिल चुनौती है। अभी तक के सभी विद्रोह या तो संख्या में कम थे, या फिर बाहर से आए। लेकिन इस बार मामला अलग है —
यहाँ 60 विधायकों का दावा है, यानी पार्टी के विधायी दल का बड़ा हिस्सा। यदि यह संख्या विधानसभा के भीतर सत्यापित हो जाती है, तो नेता प्रतिपक्ष का मामला कानूनी और संवैधानिक रूप से भी जटिल हो सकता है। विधानसभा अध्यक्ष को तय करना होगा कि असली विधायी दल का नेता कौन है।
बागी गुट अभी पार्टी तोड़ने की बात नहीं कर रहा, लेकिन 60 विधायकों का समर्थन पार्टी के संगठनात्मक संकट को खुलकर उजागर करता है। यदि यह विवाद लंबा खिंचा, तो TMC के विभाजन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
नेता प्रतिपक्ष का विवाद — असली मुद्दा क्या है?
इस पूरे संकट की जड़ में है — नेता प्रतिपक्ष का पद। विधानसभा में विपक्ष का नेता वह होता है जो सत्ता पक्ष को चुनौती देता है और संसदीय लोकतंत्र को जीवंत रखता है। यह पद प्रतिष्ठा, संसाधन और राजनीतिक शक्ति तीनों का प्रतीक है।
TMC के पास इस समय विपक्ष में 80 विधायक हैं। जब शोभनदेब चट्टोपाध्याय को इस पद पर बिठाने की कोशिश हुई, तो रितब्रत खेमे ने आरोप लगाया कि उनकी सहमति बिना उनके हस्ताक्षर कर दिए गए। इस आरोप ने पार्टी के भीतर विश्वास का संकट खड़ा कर दिया।
आगे क्या? — बंगाल की राजनीति में नया मोड़
फिलहाल ममता बनर्जी खेमे की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सीमित आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है। पार्टी नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है — शायद इसलिए कि कोई भी कदम स्थिति को और उलझा सकता है।
लेकिन राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। अगर विधानसभा अध्यक्ष रितब्रत के दावे पर सुनवाई करते हैं, तो यह मामला अदालत तक भी जा सकता है। और अगर 60 विधायकों का आंकड़ा सच निकला, तो यह TMC के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक विद्रोह होगा।
बंगाल की "दीदी" ने कई तूफान झेले हैं — वामपंथ से सत्ता छीनी, BJP को रोका, लेकिन अपने ही घर में लगी यह आग शायद सबसे कठिन परीक्षा है।
