DU Professor Murder: ज़मीन विवाद में प्रोफेसर की हत्या — 1,400 KM दूर से आए हत्यारे गिरफ्तार
🔑 मामले के मुख्य तथ्य
- पीड़िता: देबस्मिता पॉल (49), असिस्टेंट प्रोफेसर, शिवाजी कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी
- आरोपी: रामप्रसाद दास (42), पत्नी बनश्री दास (36) और उनका नाबालिग बेटा
- हत्या की तारीख: 3 जून 2026, वासुंधरा एन्क्लेव, पूर्वी दिल्ली
- विवाद: बर्धमान (पश्चिम बंगाल) में प्रोफेसर की पैतृक संपत्ति
- गिरफ्तारी: 7 जून 2026, बर्धमान से
- दर्ज धारा: भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या)
पूरा मामला क्या है?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिवाजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत देबस्मिता पॉल की उनके खुद के फ्लैट में बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्या के पीछे की वजह थी — पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में स्थित उनकी पैतृक संपत्ति का एक पुराना विवाद। इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए, आरोपी परिवार 1,400 किलोमीटर का सफर तय कर दिल्ली पहुंचा और एक सुनियोजित हत्या को अंजाम दिया।
यह कोई आवेश में की गई हत्या नहीं थी। यह एक ठंडे दिमाग से रची गई साजिश थी — जिसमें नकली पहचान, CCTV से बचने की कोशिश, और वापस जाने की पूरी योजना शामिल थी। लेकिन दिल्ली पुलिस की तकनीकी टीम ने महज पाँच दिनों में इस रहस्य को सुलझा लिया।
संपत्ति विवाद — विवाद की जड़
रामप्रसाद दास और उनकी पत्नी बनश्री दास 2023 से बर्धमान में देबस्मिता पॉल की पैतृक संपत्ति पर रह रहे थे। यह संपत्ति परिवारी बंदोबस्त के जरिए देबस्मिता को मिली थी। प्रोफेसर ने बार-बार इस परिवार से मकान खाली करने को कहा, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। वर्षों तक यह विवाद अनसुलझा रहा।
इसी साल, जब देबस्मिता ने अंतिम और सख्त चेतावनी दी कि मकान खाली किया जाए — तो इस परिवार ने एक खौफनाक फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि जो समस्या पैदा कर रही है, उसे ही खत्म कर दिया जाए।
घटनाक्रम — कदम दर कदम
पुलिस की जांच — कैसे पकड़े गए आरोपी?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात थी आरोपियों की योजना की गहराई। उन्होंने असली पहचान छुपाने के लिए किसी और के आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। इमारत में घुसते और निकलते समय चेहरा ढककर रखा। लेकिन तकनीक के सामने ये सब काफी नहीं था।
दिल्ली पुलिस ने हाउसिंग कॉम्प्लेक्स और आसपास के इलाकों में लगे तमाम CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। गेस्ट हाउस के रिकॉर्ड से नकली आधार से जुड़े मोबाइल नंबर सामने आए। उन नंबरों को तकनीकी निगरानी में रखा गया, जिससे आरोपियों की गतिविधियाँ ट्रेस हुईं — गेस्ट हाउस से टैक्सी, ऑटो, आनंद विहार बस स्टैंड और अंत में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक।
बर्धमान में भी पुलिस ने रेलवे स्टेशन की CCTV फुटेज देखी और आरोपियों को उनके छिपने के ठिकाने तक पहुँचाया। मात्र पाँच दिन में पूरी जांच पूरी हुई — यह दिल्ली पुलिस की तकनीकी दक्षता का एक उदाहरण है।
यह मामला समाज को क्या संदेश देता है?
देबस्मिता पॉल एक शिक्षित, स्वतंत्र और अपने अधिकारों के प्रति सजग महिला थीं। उन्होंने कानून का रास्ता अपनाते हुए बार-बार संपत्ति खाली करने को कहा। लेकिन उनकी यही मजबूती उनकी जान ले गई।
यह मामला देश में संपत्ति विवादों की गहरी जड़ों को उजागर करता है। जब कानूनी रास्ते धीरे चलते हैं और भावनाएं तेज़ — तो हिंसा का रास्ता खुल जाता है। ऐसे मामलों में अदालतों की त्वरित सुनवाई और पुलिस की पहले से सक्रियता ज़रूरी है।
एक और चिंता का पहलू यह है कि इस जघन्य अपराध में एक नाबालिग बच्चा भी साथ था। बच्चे के मन पर इस घटना का क्या असर पड़ेगा — यह भी विचार का विषय है।
कानूनी पहलू — आगे क्या होगा?
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इस धारा में दोष सिद्ध होने पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है।
इसके अलावा आरोपियों पर नकली पहचान का उपयोग करने, साक्ष्य छुपाने और षड्यंत्र रचने के आरोप भी जोड़े जा सकते हैं। नाबालिग बच्चे के मामले में किशोर न्याय बोर्ड के सामने सुनवाई होगी।
